Thursday, July 25, 2013

जब-जब फूटता है




जब-जब फूटता है
दिल में उसकी यादों का लड्डू
मीठी सी लगने लगती है सारी कायनात
टपकने लगती है सांसों से चाशनी
और मैं बन जाती हूं मिठास....
गुलदाने सी चिपक जाती हैं
जहां-तहां मुझसे, तेरी बातें,
बाहों में तेरी
ताजे गर्म गुड़ सी हो जाती हैं मेरी रातें,
मिश्री की डली बन जाते हैं अहसास
जब-जब फूटता है....


Friday, July 12, 2013

‘टमाटर के सेंटीमेंट्स’



कहते हैं कि छह महीने बाद घूरे के भी दिन फिर जाते हैं लेकिन, टमाटर के दिन अब जाकर बहुरे हैं। दाम बढ़ाने के एवज में टमाटर प्रजाति भगवान का लाख-लाख शुक्रिया अदा कर रही है। धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए टमाटरों के सरदार ने भगवान को एक पत्र लिख भेजा है, जो इस प्रकार है-
लाली मेरे टमाटर की जित देखूं तित लाल
टमैटो खरीदन मैडम गईं, दाम सुन हो गर्इं लाल
गॉड तुस्सी ग्रेट हो....अब पता लगा कि आपके घर में देर है अंधेर नहीं।  हम सालों से इस आस में थे कि कभी तो हमारे दाम बढ़ें और हमें राष्ट्रीय सब्जी का दर्जा हासिल हो पर हर बार चर्चा आलू-प्याज से आगे नहीं बढ़ पाती थी, (न जाने दोनों के दोनों विलायत से कौन सी डिग्री लेकर आएं हैं, कइयों दफा सब्जी की टीआरपी में अव्वल आ चुके हैं) पर अबकी हमारे गुर्गों ने आलू-प्याज के मुंह पर ऐसी लालिख (टमाटर का कलर) पोती कि सब्जियों के राजा (आलू ) का बाजा बजा दिया। अब बहस-मुबाहिसों में हमारा नाम लिया जा रहा है, फेसबुक पर हम छाए हैं और घर-घर हमारा ही राग छिड़ा हुआ है। सब्जी मंडी में हम हॉट सीट पर बैठे हुए हैं और हमारे ठाठ-बाठ देख-देखकर बाकी सब्जियां कुड़-कुड़ कर लाल हुए जा रही हैं।
भगवान अब तक अपनी व्यथा हम मन में ही छुपाए थे। आप ही बताइए प्रभु जो  टमाटर सब्जियों को रंग-रूप-स्वाद प्रदान करता है, वो अब तक रुपयों के दाम बिक रहा था...? गिरते रुपये के रहमो-करम से अब हमें डॉलर संपन्न लोग ही खरीद पाया करेंगे। अगर इसी तरह मंहगाई का हाथ हमारे सिर पर रहा तो लोग टमाटर का दर्शन विंडो शॉपिंग के दौरान किया करेंगे। हमारे रख-रखाव के लिए सरकार एक अलग से मंत्रालय बनाएगी जो समय-समय पर देश विभिन्न राज्यों के टमाटरों की प्रदर्शनी लगाया करेगा। आलू के साथ हमें रासलीला कतई पसंद नहीं, इसलिए अब हम सिर्फ पनीर जैसी उच्च वर्गीय सब्जियों के साथ रिलेशन रखेंगे। समाज में हमारे लिए मार-काट मचेगी, इंडिया टीवी पर फ्लैश कुछ यूं चलेगा ‘...भाई-भाई में टमाटर के लिए चलीं गोली, बहन बोली, डोंट प्ले टमाटर के लिए खूनी होली..।’ कुछ ही दिन बाद सुर्खियों में एक ओर घोटाला सामने आएगा.देश का सबसे बड़ा घोटाला ‘...टमाटर घोटाला’ फलां-फलां नेता की बीवी ने अपनी किचेन की टांड़ पर छुपा कर रखे थे एक बोरा टमाटर। विपक्षी नेता के बेटे के टिफिन में रोज टमैटो सॉस रखी देख सत्ताधारी दल ने बिठाई सीबीआई की जांच। टीवी चैनल वाले चीख-चीख कर कहेंगे....लालू चारा चबा गए, कांग्रेसी कोयला खा गए...जिन्हें कुछ नहीं मिला वे टमाटर पचा गए...। और तो और प्रभु....नाना पाटेकर की फिल्म का डायलॉग होगा...‘साला एक टमाटर घर का बजट बिगाड़ देता है....’। एक बूढ़ी मां अपने बेटे के हाथ में टमाटर थमाती हुई कहेगी, ले बेटा, ये टमाटर मैंने अपनी होने वाली बहू के लिए संभालकर रखा था। उससे कहना जिस दिन उसका चूल्हा पूजन हो, इसी टमाटर की सब्जी बनाए।

Monday, July 8, 2013

मुहब्बत का गुमान


वो कहते हैं
सिर चढ़ जाती है मुहब्बत
करने से इजहार बार-बार
कोई उनसे पूछे जरा
क्यों गूंजती है मस्जिद में
पांच वक्त की अजान, और
मंदिरों में घंटे-घड़ियाल...
क्यों उसके सजदे में
हर बार ही झुकता है सिर
क्यों बिना वजह ही सारा दिन
बच्चा मां का पल्लू पकड़े
पीछे-पीछे घूमता है,
क्यों सूरज रोज सवेरे
लाल चूनर ओढ़ाता है धरती को
क्यों हवा के झोंके मदमस्त
किए जाते हैं तरु-पल्लव को
क्यों हर बार मेघ ही शांत करते हैं
धरती की प्यास को
क्यों चकोर सारी रात
तकता रहता है चांद को,
अब बता,
किसे है मुहब्बत का गुमान
तुझे या मुझे....?