Monday, November 12, 2012

उल्लू जी पधारो म्हारे देस



हे उल्लू जी साल भर तक हमने आपसे जो कुछ भी अंट-शंट कहा उसके लिए सॉरी। बड़ी भारी भूल हो गई। दो दिन बाद दीवाली है। दीवाली पर सूटेड-बूटेड होकर लक्ष्मी मैया के साथ आप हमारे घर पधारें। हमें आशीष दें। अगली सुबह लक्ष्मी मैया को हमारे घर रहने दें और आप वापस जंगल में चलें जाएं तो हम पर आपकी बड़ा कृपा होगी। 
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देखा जाए तो हमारा हिंदुस्तान उल्लू प्रधान देश है। यहां हर शाख पर उल्लू ही उल्लू दिखाई देते हैं, खासतौर से राजनीति नामक वृक्ष की शाखाओं पर। नाहक ही सरकार ने मोर को  राष्ट्रीय पक्षी घोषित कर दिया। अगर राष्ट्रीय आयटम घोषित करने का विभाग हम जनता जर्नादन हाथ में होता तो हम निश्चित रूप से उल्लू को राष्ट्रीय पक्षी बनाते। हर क्वालिटी के, हर साइज के, हर चौखटे के, हर कलर के उल्लू....किस्म-किस्म के उल्लू। उल्लू को ढूंढने के लिए हमें जंगलों की खाक नहीं छाननी पड़ती। कोई संसद की छत पर बैठा दिखाई देता तो कोई विधान सभा की मुंडेर पर विपक्षी को घुन्ना कर देख रहा होता। एक को बुलाते-थोक में आते। खैर....जाने दीजिए हम दीवाली के पावन मौके पर किन फेक उल्लुओं की बात करने बैठ गए। अब आॅरिजनल उल्लुओं पर आते हैं। आज हम जिस उल्लू की बात आपको बताने जा रहे हैं उसकी महिमा अपरंपार है। उसके बिना मिथ्या अर्थ व्यववहार है। वही धन का आधार है। कहने को तो लक्ष्मी की सवारी है लेकिन सारे पक्षियों पर भारी है। कलियुग के समय में उल्लू की महिमा का जितना बखान किया जाए उतना कम है। ‘रात में जागता है, दिन में सोता है, सारा टाइम सपनों में खोता है। घर का ठिकाना नहीं, जंगल से प्यार है...नियम गए चूल्हे में, मानो उसकी सरकार है।’ एकदम कलियुगी यूथ के माफिक। जाने-अनजाने उल्लू हमारे यूथ का प्रतिनिधित्व कर रहा है। ऐसे सर्वगुण संपन्न पक्षी को बारम्बार नमस्कार।
उल्लू जी के पास इतने सारे गुण हैं फिर भी इन्हें अपना प्रचार-प्रचार पसंद नहीं। सन्यासी की भांति जंगल में शांति पूवर्क रहते हैं। दूसरी तरफ मोर है, हर तरफ घूमता रहता है। जरा सी बात हुई नहीं कि चीखना शुरू कर देता है। बारिश में ख्वामखाह नाचता है। उल्लू जी को पता है कि ये बारिश, ये मौसम, कभी खुशी-कभी गम...ये सब जीवन का चक्र है। इसके लिए नाचना क्या, चीखना क्या...। कितना ज्ञान है उल्लू को। जिस समय को दुनिया अंधकार, रात्रि, नकरात्मक या आराम करने काल समझती है, उल्लू उस काल को अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए इस्तेमाल करता है, यह प्रेरणादायक है। ग्रीक में बुद्धि की देवी, एथेन के बारे में कहा जाता है कि वे उल्लू का रूप धरकर पृथ्वी पर आई हैं। उल्लू धन की देवी लक्ष्मी का वाहन और इसलिए वह मूर्ख नहीं हो सकता है। धन कमाने में अच्छे-अच्छों के छक्के छूट जाते हैं, जिसके पास धन की देवी हों उसके पास कितनी कमाल की बुद्धि होगी। (प्वॉइंट टू बी नोटेड)...मैनेजमेंट गुरू।
अगर मैंने कभी कोई धार्मिक चैनल शुरू किया तो सबसे पहले उल्लू बाबा को प्रवचन देने के लिए आमंत्रित karoonga। माता-बहनें उल्लू बाबा से दीक्षा लेंगी। उल्लू जी की आरती होगी। उल्लू के नाम पर चैनल वाले उल्लू नहीं बनाएं, खास ख्याल रखा जाएगा। बड़े-बड़े चौराहों पर आपकी मूर्तियां लगवाई जाएंगी। इन चौराहों पर उल्लू-सत्संग की विशेष व्यवस्था होगी।

उल्लू जी से दरख्वास्त
हे उल्लू महाराज लक्ष्मी मां सहित आपके दर्शन को हम धरतीवासी अकुला रहे हैं। आपको प्रसन्न करने के लिए हमने कितने मुहावरे गढ़े हैं, कितनी कहावतें बनाई हैं, कितनी गालियों को रचा है....आप क्या जानें..? उल्लू का पट्ठा, अबे ओ उल्लू, उल्लू है क्या, उल्लू बनाया बड़ा मजा आया, उल्लू सीधा करना, उल्लू की दुम, बस एक ही उल्लू काफी था, हर शाख पे उल्लू बैठा है.. आदि तो उदाहरण मात्र हैं..।
आप तो यही समझते हैं ना कि हम सिर्फ दीवाली पर आपको याद करते हैं...। अरे बाबा हर क्षण आप हमारी यादों में समाए रहते हैं। हम आपको भूल न जाएं इसके लिए हमने कई लोगों को उल्लू नाम से संबोधित करना शुरू कर दिया है। नेता तो खासतौर से आपकी श्रेणी में आ गए हैं। गुस्ताखी माफ उल्लू जी...इसे आप अपनी इंसल्ट न समझिए पर क्या करें डंकी भी मना कर देते हैं कि नेताओं को गदहा मत कहा करो, इसलिए उन्हें उल्लू कहना पड़ता है। सॉरी! इसे हमारा छुटप्पन समझकर माफ दीजिए। ‘क्षमा बड़न को चाहिए छोटन को उत्पात।’ हे उल्लू! इस दीवाली पर सारे-गिले-शिकवे माफ करके हमें सलक्ष्मी अपने दर्शन दीजिए।

लक्ष्मी माता को लाने की ट्रिक्स
...पिछली बार दीवाली पर लक्ष्मी मैया को आप पड़ोसियों के घर ड्रॉप करके अकेले ही हमारे घर की कॉल बैल बजा रहे थे। दिज इज नॉट फेयर। आना हो तो लक्ष्मी जी को साथ लेकर ही आना। अगर वो कहीं और जाना चाहें तो जबरदस्ती अपना डायरेक्शन हमारे घर की तरफ कर लेना। लक्ष्मी मैया सवाल-जवाब करें तो कहना की हवा ने रुख बदल लिया है। वो कितने भी ब्रेक लगाएं, कह देना....मैया ब्रेक फेल हो गए हैं। जैसे ही हमारा घर आए...कह देना..मैया सीधी टांग पंक्चर हो गई है। लगता है रॉकेट मेरी टांग में आकर ही लगा है। आप मैया को हमारे घर बैठा देना और कहना, मैं पंक्चर जुड़वाने जा रहा हूं तब तक इसी घर में स्टे कीजिए। उल्लू जी हमने आपके लिए कितने सारे गिफ्ट आयटम्स तैयार करके रखे हैं। आपकी उल्लूआइन के लिए शॉल है। आपके लिए टेस्टी ड्रायफ्रूट्स हैं। एक बार सेवा का अवसर अवश्य प्रदान करें। विद लक्ष्मी आएं और अगले ही क्षण अकेले टरक जाएं।