Thursday, November 1, 2012

बा मुलाहिजा होशियार... करवाचौथ आ रही है!




पत्नी द्वारा पतियों की जेब खाली कराने का व्रत (करवाचौथ) हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। पतियों को छलनी से देखते हुए इस दिन पत्नी मन ही मन कहती है, डार्लिंग...मैं तुम्हें जीवन पर्यंत छलती रही और आगे भी छलूंगी। ये छलनी इस बात की साक्षी है। इस दिन पत्नी के ब्यूटीपार्लर जाने पर पति कोई आॅब्जेक्शन नहीं उठाता, बल्कि उसके तैयार होने पर खुश होता है। पत्नी भी महंगे से महंगा फेशियल यह सोचकर कराती है कि दोबारा ऐसा मौका नहीं आएगा। रात में पत्नी का चेहरा देखकर पति सोचता है कि बीवी के चेहरे पर आने वाली चमक का राज उसका प्यार है, वह बावरा यह नहीं जानता कि यह तो फ्रूट फेशियल का कमाल है। 


वैसे देखा जाए तो यह त्योहार किसी भी विवाहित स्त्री के लिए साल का सबसे अच्छा दिन होता है। इस दिन उसे बिना किसी डिमांड के तरह-तरह के उपहार मिलते हैं। जो पति साड़ी दिलाने के नाम पर बीवी को हफ्तों तक नचाता रहता है, वह करवाचौथ पर बीवी के लिए खुद महंगी साड़ी लेकर आता है। (बात अलग है कि साड़ी देखती ही पत्नी की जुबां कहती है कि अरे इसकी क्या जरूरत थी...लेकिन मन कहता है कि साड़ी लानी थी तो मुझसे पूछ लेते...मुझे चौड़े बॉर्डर की प्लेन साड़ी चाहिए थी, जिस पर छोटे-छोटे बूटे हों, कलर लाइट पर्पल या लेमन हो...ब्लाउज फुल स्लीव्स चाहिए था...ये रेड कलर की साड़ी ले आए हो....इसे पहनकर मैं बिल्कुल कार्टून लगूंगी)।  इस विशेष दिन पत्नी रानी पर किचेन में काम करने के लिए दवाब नहीं डाला जाता। सारा दिन देवी जी टीवी पर मनपंसद धारावाहिक देखती रहती हैं। पति यह सोचकर रिमोट नहीं मांगते कि कहीं पत्नी का ध्यान न टूट जाए और जागृत अवस्था में उसके भूख-प्यास के सेंसर खाने-पीने की डिमांड न करने लगें अत: हसबैंड सुबह उठकर नाश्ता नहीं मांगते। दोपहर में लंच के लिए भी नहीं कहते। मजे की बात तो यह है कि पत्नी तो व्रत रखती ही है, खाना न मिलने के कारण पति का भी व्रत हो जाता है। यानि एक तीर से दो शिकार। जिन महिलाओं के पति अन्य दिनों में पत्नी सेवा नहीं करते, करवाचौथ पर उनसे विशेषतौर पर खुन्नस निकाली जाती है। प्यार-प्यार में पत्नी घर का सारा काम करवा लेती है, पति भी यह सोचकर काम करता रहता है कि पत्नी ने उसकी दीर्घायु के लिए सुबह से एक घूंट पानी नहीं पिया। ... बेचारे को यह नहीं पता कि बीवी यह सोचकर खुश है कि चलो व्रत के बहाने से ही सही....डायटिंग तो हो रही है। कई नादान तो ‘करवाचौथ ईव’ पर पत्नी के लिए विशेष पकवान लेकर आते हैं ताकि अगले दिन उनकी प्राणप्रिया को भूख-प्यास न लगे। (ऐसे पति पहले खुद ही पत्नी को सिर पर चढ़ाते हैं और बाद में रोते हैं कि पत्नी उन्हें घास नहीं डालती)। शायद वे ये नहीं जानते कि करवाचौथ पर ‘अर्ली इन द मॉर्निंग’ जब आप सो रहे होते हैं तब पत्नी बैड टी ले चुकी होती है, कई तो स्वल्पाहार कर चुकी होती हैं। इस दिन पति-पत्नी के बीच प्रेम की इतनी जबरदस्त बाढ़ आती है कि उसका प्रकोप साल भर पतियों को सहना पड़ता है। खैर....हमारा क्या जाता है.....जब मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी। हमारा तो पत्नियों से सिर्फ इतना ही अनुरोध है कि आप अपने पतियों को ‘एक दिवसीय राजा’ मत बनाइए। उनसे करवाचौथ पर भी वैसा ही व्यवहार करें जैसा आम दिनों में किया जाता है। ताकि करवाचौथ की अगली सुबह जब उनकी आंख खुले तो उन्हें इस बात का भ्रम न रहे कल उन्होंने बहुत बढ़िया सपना देखा।