Tuesday, November 20, 2012

जिंदगी




विचारों का अधूरा मंथन
कभी प्रेम, समर्पण, कभी अनबन
जिंदगी- एक अंतरद्वंद!
थरथराहट बर्फीली पवन की
कभी रेगिस्तानी तपन
कभी बेमौसम बरखा, कभी सूखा सावन
जिंदगी- गूढ़ प्रश्न!
कभी टीस भरा दर्द, कभी घाव की जलन
एक अनजाना दर्द, कभी कांटों भरी चुभन
जिंदगी-बुरा स्वप्न!
संभवत:
खुशी का एक क्षण, धरती को छूता गगन
नई उमंगें, एक मतवालापन
जिंदगी- शेष जीवन!

-राजीव शर्मा