Monday, March 4, 2013

भगवान की अर्जेंट मीटिंग



विष्णुलोक के राउंड पर गए नारद जी ने जब विष्णु भगवान का मूड आॅफ देखा तो उनसे न रहा गया, छूटते ही बोले, क्या हुआ प्रभु....आपके चेहरे पर 12 क्यों बजे हुए हैं? एनी प्रॉब्लम?....मां लक्ष्मी कहां हैं?...विष्णु जी शेषनाग की शैय्या पर जम्हाई लेते हुए बोले, क्या बताऊं नारद ...कई महीनों से नोटिस कर रहा हूं, अपनी तो डिमांड ही एकदम डाउन हो गई है। कोई पूछता ही नहीं...। आम देवताओं की बात छोड़िए, लक्ष्मी भी उखड़ी-उखड़ी रहती है....। विष्णु जी के मुख से लक्ष्मी जी ने जैसे ही अपना नाम सुना, गुस्से में दौड़ी चली आईं...कहने लगीं...अपनी अलसाई जुबान से मेरा नाम मत लिया कीजिए। जब देखो तब सोते रहते हैं...किसी काम की फिक्र नहीं है। ऊपर से कहते हैं कि डिमांड कम हो गई है। अरे सुस्सी फैलाने के अलावा आपने कौन सा काम किया है जो लोग आपको पूछें......मां लक्ष्मी इससे पहले कुछ और कहतीं, नारद जी बोले...माते इसमें प्रभु का कोई कसूर नहीं। इधर विष्णु भगवान की डिमांड डाउन है, उधर भगवान शिव और ब्रह्मा जी की भी यही शिकायत है कि उन्हें कोई भाव नहीं देता। क्यों न ऐसा किया कि शिवरात्रि ईव पर सभी देवी-देवताओं की मीटिंग आॅर्गनाइज की जाए और उन कारणों पर विचार किया जाए जिसके चलते पब्लिक में  ‘इस्टेब्लिश भगवानों’ की डिमांड कम हो रही है। 

मीटिंग का दृश्य
सभी देवी-देवता अपने-अपने आसन पर बैठे हुए हैं। नारद जी ने मीटिंग का एजेंडा बताते हुए कहा कि जिस-जिस भगवान को जिस-जिस तरह की शिकायत हो वह अपने स्थान पर खड़े होकर बताएं। शुरुआत करते हैं प्रथम पूज्य गणेश के साथ।
गणपति- मैं तो आप लोगों का बच्चा हूं। आप लोगों की कृपा और मुबंई में आयोजित होने वाले गणपति फेस्टिवल की वजह से मेरी डिमांड दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। मुझे किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। आय एम आॅल राइट...। गणेश जी की बात सुन नारद मुनि बोले, वैलडन गणेश....होनहार बिरवान के होत चीकने पात...। आपके जन्म के समय ही हमें पता लग गया था कि आप कुछ अनोखा करेंगे।




(अब आई प्रभु राम की बारी)
रामचंद्र जी- हे नारद! सबसे ज्यादा बुरी गत तो मेरी है। एक अकेली रामनवमी को छोड़ दिया जाए तो दूसरा कोई आॅकेजन नहीं है जब मेरी पूछ होती हो। मैंने अपने प्रचार-प्रसार का जिम्मा हनुमान को सौंपा था। पर वह तो चार कदम आगे निकला, प्रचार के पैसों से ‘मार्केटिंग कैसे की जाए’ पुस्तक खरीद लाया और पुस्तक पढ़ते-पढ़ते मेरी जगह अपना प्रचार शुरू कर दिया। अब गुरू तो गुड़ ही रह गया और चेला चीनी हो गया है। हर जगह ‘जय बजरंग बली-तोड़ दे दुश्मन की नली’ होता रहता है। हर ट्यूसडे को हनुमार के मंदिरों पर भीड़ लगी रहती है और मैं टुकुर-टुकुर देखता रहता हूं। यहां तक कि दशहरे पर भी लोग कहते हैं कि हम राम नहीं रावण बनना चाहते हैं...! ऐसा कलियुग। सोचता हूं ऐसा सुनने से पहले मेरे कानों ने सुनना क्यों न बंद कर दिया....धरती क्यों न फट गई....मैं उसमें समां क्यों न गया....रामचंद्र जी की बात बीच से काटती हुईं सीता मैया बोलीं.....नौटंकी बंद करो। वैसे भी मैं आपको सपोर्ट नहीं करने वाली। बहुत जुल्म किए हैं मेरे ऊपर। तुम्हें तो सिर्फ अपनी मां प्यारी थीं ना। ये तो शुक्र मनाओ कि उन दिनों मैंने किसी महिला संगठन को कॉल नहीं किया वर्ना......रामचंद्र जी बोले....अरी बस भी कर भाग्यवान, कब तक कोसती रहेगी मुझे। तेरी ही बद्दुआ लगी होगी जरूर, तभी तो भक्त भी नहीं पूछते।
नारद जी.........साइलेंस प्लीज। ये मीटिंग ‘कहानी घर-घर की’ खेलने के लिए नहीं आॅर्गनाइज की है। घर की लड़ाई घर में ही सुलटाइएगा।
(अब शिवजी की बारी आई)
शिव जी-हम तो बचपन से ही भोले हैं नारद! हमें कोई पूजे तो ठीक, नहीं पूजे तो ठीक। चूंकि हमारी कृपा से कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति हो जाती है इसलिए हमारी दुकान चलती रहती है। हफ्ते भर टोटा का सोमवार को पूरा हो जाता है। कलियुग में चूंकि कन्याएं देर से विवाह करने लगी हैं, इसलिए ज्यादा उम्र तक हमें भजती रहती हैं। बची-खुची कसर शिवरात्रि और सावन के सोमवार पूरे कर देते हैं। हां, पर अब पहले जैसी बात नहीं रही......क्या करें, ये तो समय का फेर है। भला हो लाइफ ओके चैनल वालों का, टीवी पर महादेव सीरियल दिखाकर मुझे फिर से लाइम लाइट में ला दिया है। वैसे हमारा सिद्धांत है-‘किस-किस को गाइए, किस-किस को रोइए, आराम बड़ी चीज है, मुंह ढक कर सोइए।’ आप लोग जो एजेंडा बनाएं, हमारी स्वीकृति उसमें अभी से समझिए।

(कृष्ण जी का नंबर आया)
कृष्ण जी-जब तक समोसे में आलू रहेगा, तब तक धरती पर मेरा जादू चालू रहेगा। मैं द्वापर युग में तो छाया ही था, अब कल्कि बनकर कलियुग में भी लोगों के पूजाघरों में राज करूंगा। मेरी पीआर टीम बहुत सशक्त है, धरती पर पहुंचने के लाखों साल पहले ही जन-जन को मेरा पूरा बायोडाटा पता लग गया। नाम, मम्मी-पापा का नाम, मेरी एजूकेशन,  अस्त्र-शस्त्र, मेरा रेजिडेंस.....सब कुछ लोगों को रटा हुआ है। थैंक्स टू माय पीआर टीम। अगर आप लोग चाहें तो मेरी पीआर टीम से पार्ट टाइम सर्विस ले सकते हैं। हां, थोड़ी महंगी है लेकिन डिमांड में बने रहने के लिए पैसे नहीं देखे जाते...। ........कृष्ण जी के बाद एक-एक कर बह्मा जी, सरस्वती मां, लक्ष्मी जी ने विचार रखे।
नारद मुनि- शनिदेव और साईंबाबा नहीं दिखाई दे रहे...? कहां हैं दोनों?
नारदमुनि का सवाल सुनकर दुर्गा मां बोलीं, और कहां होंगे...दोनों अपने भक्तों से घिरे होंगे। उनके पास टाइम ही कहां है मीटिंग-शीटिंग अटेंड करने के लिए। द मोस्ट डिमांडिंग देव हैं दोनों। पता नहीं हिप्नोटिज्म सीख लिया है या शिव खेड़ा की किताब ‘जीत आपकी होगी’ पढ़ ली है...। एकदम से भक्त उनकी तरफ ट्रांसफर हो गए हैं। अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान मैं तो बस इतना ही कहना चाहूंगी कि हम लोगों को भी सॉलिड स्ट्रेटजी बनानी होगी। भक्तों के पास इतना टाइम नहीं है कि सालों तक तप करते रहें। अब दो-चार दिन रिक्वेस्ट करके देखते हैं, अगर डिमांड पूरी नहीं होती तो अगले देवता को फॉलो करने लगते हैं। शनिदेव अपने भक्तों को डरा-धमका कर रखते हैं। सपने में दर्शन देते हैं। साईं बाबा भी चमत्कार करते हैं। तभी तो लोग अब शादी के बाद हनीमून मनाने से पहले शिरडी घूमने जाते हैं...और हम लोग....पूजा के बदले भक्तों को क्या देते हैं...? सिर्फ उनकी परीक्षा?....अपनी दिमाग की बत्ती जलाइए। नए देवी-देवता नई सोच के साथ मार्केट में कदम रख रहे हैं, हम वही घिसे-पिटे आइडियाज पर चलते हैं। फेसबुक यूज करना सीखिए, ट्विटर पर अपने चमत्कारों के बारे में लिखिए...अपना होमपेज बनाइए। फिर देखिए कैसे छाते हैं आप....।