Thursday, November 8, 2012

यादों की चाशनी में


सनी हुई है मेरी हर बात
तेरी यादों की चाशनी में
लिपटे हैं मेरे दिन-रात
तेरी यादों की चाशनी में
हर वक्त हर घड़ी अब
तेरी ही आरजू है
मैं बन गया मिठास
तेरी यादों की चाशनी में...
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कुछ तो कमी है लेकिन
जो स्वाद वो नहीं है
मीठा बहुत हूं लेकिन
बात वो नहीं है
कइयों दफा है चाखा
तब ये पता लगा है
तुझमें नमक है खास
तेरी यादों की चाशनी में
- राजीव शर्मा