Thursday, January 7, 2010

तुम शक्ति हो


जब भी जीवन के झंझावत में, तुम ख़ुद को खोया पाना

तुम नारी हो, तुम शक्ति हो, ये कभी भूल न जाना।


जब भी आखों के पोरों से, दो बूँद नीर की ढुलकें

तुम नीर भरी दुःख की बदली, ये सोच नीर पी जाना,

जब लगे बीच मझधार में लहरों संग बही मैं जाती हूँ,

साँसों की जब तक आस रहे, तब तक लहरों से टकराना ।।

Wednesday, January 6, 2010

नयी सुबह के गीत गायें

रह  गया बाकी बहुत कुछ, साथ मिलकर पूर्ण कर लें

 नभ  को झुका दें हम धरा पर, धरती को नभ के तुल्य कर लें

छेड़े चलो वो रागिनी हर दिल ख़ुशी से झूम जाए

रात बीती, बात बीती, नयी सुबह के गीत गायें


आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं