Tuesday, March 19, 2013

नए जमाने की कह मुकरियां




देखूं उसको थर-थर कांपू
वो पीछे मैं आगे भागूं
भूल गई सुध अपने तन की
ऐ सखि ब्वॉयफ्रेंड? ना सखि मंकी!
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वो मुझको दुनिया दिखलाता
मेरी हर उलझन सुलझाता
नहीं है कोई उससे ग्रेट 
ऐ सखि ब्वॉयफ्रेंड? ना सखि नेट!
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उसका जादू सब पर भारी
वो भगवन है, हम हैं पुजारी
बिन उसके लाइफ जाती रुक
ऐ सखि ब्वॉयफ्रेंड? ना सखि फेसबुक! 
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उसके जैसा नहीं कोई ज्ञानी
विद्यावान गुणी विज्ञानी
पल में प्रॉब्लम कर देता हल 
ऐ सखि ब्वॉयफ्रेंड? ना सखि गूगल!
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वो मेरा बॉडीगार्ड निराला
है दबंग पर भोलाभाला  
खुद को भूलूं, उसे न भूलूं
ऐ सखि ब्वॉयफ्रेंड? ना सखि सल्लू!

घर बनवावे, कार दिलावे
संग वो हो तो लाइफ बनावे
उसके जैसा हितैषी कौन
ऐ सखि ब्वॉयफ्रेंड? ना सखि ‘लोन’

ज्यों ही मार्च महीना आता
दिल मेरा वो है धड़काता
चुरा ले गया मेरा रिलेक्स
ऐ सखि ब्वॉयफ्रेंड? ना सखि टैक्स

- राजीव शर्मा ‘राज’