ताज नगरी में आकर टूरिस्ट आख़िर क्या देखना चाहता है। विदेशी डांस। विदेशी सड़कें। विदेशी बिल्डिंग। अगर यही सब देखना है तो वह आगरा क्यों आएगा। ज़रा सोचिये....
ताज हैरान था, शायद उस पर भरी पड़ रहा था अभिषेक का जादू। ताज शांत था, शायद जल रहा था सोनम की सुन्दरता से। ताज उदास था, शायद सामना नहीं कर पा रहा था वहीदा की सादगी का। ताज नाराज था, शायद झेल नहीं पा रहा था ऋषि का अल्हड़पन।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा... जी हाँ, यही हकीकत है शहर के एक चौराहे कि, जिसने छः दशकों से ज्यादा का सफर तय किया है।
ताज... हमारा ताज। निराला ताज। शाहजहाँ का सपना. मुमताज का अरमान। दुनिया के सबसे बड़े ताज महल के माडल से पर्दा उठ चुका है। वैसी ही नक्काशी, वैसी ही पच्चीकारी का नायब नमूना। ताज के शहर के एक और ताज तराशा जा चुका है। उसी शिद्दत और उसी लगन के साथ। उसी शो के कुछ बेशकीमती फोटो। आगरा के टूरिस्म में नई शुरुआत, अदाकारी और शिल्पकारी का संगम। आगरा में कलाकृति एम्पोरियम में ताज के दस मूड का नजारा। सूरज की लालिमा में लिपटा ताज।