Friday, August 22, 2008

विजई हुए विजेंद्र, जीत गए जीतेन्द्र

बीजिंग में भारत ने इतिहास रचा है। एक गोल्ड के साथ दो कांस्य। बहुत साल लगे यहाँ तक पहुचने में। अभिनव बिंद्रा, सुशील कुमार और विजेंद्र। इन तीनों ने भारत के सीने को चौडा कर दिया है। लेकिन इनके बीच जीतेन्द्र के हौसले को जितना सराहा जाए उतना ही कम है। भले ही उसने कोई मैडल नहीं जीता लेकिन वह असली हीरो है। ठोडी में दस टाँके होने के बावजूद वह रिंग में उतरा था। उसकी इस हिम्मत की जितनी तारीफ़ की जाए उतनी ही कम है। यह जज्बा किसी भारतीय में ही हो सकता था। और उस भारतीय में जो साधारण परिवार से निकल कर आया हो। जो बड़ी शिद्दत और साहस से भारत से बीजिग तक पहुँचा।

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